डॉक्टर का संवेदनशील व्यवहार भी उपचार का हिस्सा : उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल | ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान की समीक्षा, मेडिकल कॉलेजों को सेवांकुर भारत के साथ एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश

भोपाल- उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि चिकित्सा शिक्षा का उद्देश्य केवल चिकित्सकीय ज्ञान और तकनीकी दक्षता विकसित करना नहीं है, बल्कि युवा चिकित्सकों में सेवा, संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मरीज और उसके परिजनों की भावनाओं को समझने वाला संवेदनशील चिकित्सक ही स्वास्थ्य सेवाओं को वास्तविक मानवीय स्वरूप प्रदान कर सकता है।

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने मंत्रालय में ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान की समीक्षा की। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाताओं को सेवांकुर भारत के साथ हुए एमओयू को प्रभावी एवं सतत पहल के रूप में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

मरीज के लिए डॉक्टर का व्यवहार भी उपचार का हिस्सा

श्री शुक्ल ने कहा कि डॉक्टर की मुस्कान, उसका व्यवहार और मरीज के साथ संवेदनशील संवाद भी उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कठिन परिस्थितियों में अस्पताल पहुंचने वाला मरीज और उसका परिवार चिकित्सक से आशा और विश्वास की अपेक्षा करता है। ऐसे समय में डॉक्टर का आत्मीय व्यवहार और भरोसा देने वाला संवाद मरीज में सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है तथा उपचार के प्रति विश्वास बढ़ाता है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सक का अच्छा व्यवहार केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि चिकित्सा सेवा का अभिन्न हिस्सा है। इसलिए मेडिकल शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व में संवेदना और सेवा-भाव विकसित करना जरूरी है।

ग्रामीण भारत को करीब से समझेंगे युवा चिकित्सक

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान मेडिकल विद्यार्थियों और युवा चिकित्सकों को समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के बीच जाकर वहां के जीवन और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को समझने का अवसर देगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को नजदीक से समझने से विद्यार्थियों में मरीजों के प्रति सहानुभूति के साथ वास्तविक संवेदनशीलता और सेवा की दृष्टि विकसित होगी। यह अनुभव उन्हें भविष्य में अधिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ चिकित्सा सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाने के साथ संस्कार भी जरूरी

श्री शुक्ल ने कहा कि प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने, मेडिकल सीटों में वृद्धि और चिकित्सकों की भर्ती पर लगातार कार्य किया जा रहा है। आने वाले समय में बड़ी संख्या में युवा चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करेंगे। ऐसे में यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि नई पीढ़ी ज्ञान और तकनीकी दक्षता के साथ सेवा एवं मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध हो।

उन्होंने कहा कि आज के मेडिकल विद्यार्थी ही भविष्य के चिकित्सक और स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ होंगे। इसलिए उनके प्रशिक्षण के दौरान समाज से जुड़ाव बढ़ाना और सेवा के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराना प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को दीर्घकाल में और बेहतर बनाएगा।

हर मेडिकल कॉलेज में अभियान को प्रभावी बनाने के निर्देश

उप मुख्यमंत्री ने सभी मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाताओं को निर्देश दिए कि सेवांकुर भारत के साथ हुए एमओयू को सक्रियता से लागू किया जाए। प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक कॉलेज प्रतिनिधि नामित करने और विद्यार्थियों के लिए सेवांकुर भारत का परिचयात्मक सत्र आयोजित करने को कहा गया।

उन्होंने इच्छुक विद्यार्थियों को ‘एक सप्ताह देश के नाम’ अभियान से स्वैच्छिक रूप से जोड़ने तथा चयनित विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन और कार्यक्रम के समन्वय में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

श्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सेवांकुर भारत के साथ एमओयू की पहल की है। इसका उद्देश्य चिकित्सा शिक्षा को समाज और सेवा से अधिक मजबूती से जोड़ना तथा चिकित्सा क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाना है।

सेवा के संस्कार से तैयार होगी संवेदनशील चिकित्सकों की नई पीढ़ी

उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि सरकार का प्रयास ऐसी चिकित्सक पीढ़ी तैयार करना है, जिसकी पहचान केवल चिकित्सा विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि सेवा भावना, संवेदनशील व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी हो।

उन्होंने कहा कि मरीजों के प्रति संवेदनशीलता, ग्रामीण और वंचित समाज की परिस्थितियों की समझ तथा सेवा का भाव युवा चिकित्सकों के व्यक्तित्व का स्वाभाविक हिस्सा बनना चाहिए। मेडिकल कॉलेजों और सेवांकुर भारत के निरंतर सहयोग से प्रदेश की चिकित्सा सेवाओं को और अधिक मानवीय एवं समाजोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री सुखवीर सिंह, आयुक्त श्री धनराजू एस सहित सेवांकुर भारत एवं विभिन्न चिकित्सा संस्थानों के प्रतिनिधि तथा प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के अधिष्ठाता उपस्थित रहे।

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