खंडवा/ओंकारेश्वर- मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी कहे जाने वाले ओंकारेश्वर में गुरुवार को एक ऐतिहासिक और युगांतकारी अध्याय जुड़ गया। मान्धाता पर्वत स्थित एकात्म धाम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूज्य संतों, धर्माचार्यों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास किया। वैदिक मंत्रोच्चार, शिला पूजन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुआ यह आयोजन केवल एक मंदिर निर्माण का शुभारंभ नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक एकता और सनातन समन्वय के पुनर्स्मरण का महत्वपूर्ण अवसर बन गया।
प्रातःकाल आयोजित कार्यक्रम में वैदिक विद्वानों और आचार्यों द्वारा विशेष अनुष्ठान संपन्न कराए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, संत-महात्माओं एवं अन्य अतिथियों ने पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। पूरे परिसर में धार्मिक उल्लास, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनकर स्वयं को गौरवान्वित महसूस किया।
आदि शंकराचार्य के समन्वयवादी दर्शन का प्रतीक बनेगा पंचायतन मंदिर
पंचायतन मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य द्वारा पुनर्स्थापित उस महान परंपरा को समर्पित है, जिसने विभिन्न उपासना पद्धतियों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया। भारतीय सनातन परंपरा में शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य संप्रदायों की अपनी विशिष्ट पहचान रही है। आदि शंकराचार्य ने इन सभी धाराओं के मध्य समरसता स्थापित करते हुए पंचायतन उपासना पद्धति को पुनः प्रतिष्ठित किया था।
इस दर्शन के अनुसार भगवान शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति अलग-अलग देवता नहीं, बल्कि एक ही परम ब्रह्म के विविध स्वरूप हैं। पंचायतन मंदिर इसी एकात्मता और समन्वय के संदेश को स्थापत्य और आध्यात्मिक रूप में अभिव्यक्त करेगा। यही कारण है कि एकात्म धाम में इस मंदिर का निर्माण विशेष महत्व रखता है।
प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण होगा मंदिर
प्रस्तावित पंचायतन मंदिर प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला पर आधारित होगा। मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय स्थापित किया जाएगा, जबकि चारों दिशाओं में भगवान विष्णु, सूर्यदेव, भगवान गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय निर्मित होंगे। यह संरचना भारतीय मंदिर स्थापत्य की प्राचीन पंचायतन शैली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करेगी।
मंदिर का मुख्य शिखर ‘सोमतिलक’ शैली में निर्मित होगा, जबकि गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली का होगा, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। मंदिर परिसर में सौ से अधिक कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ, भव्य तोरण द्वार और विशाल मंडप निर्मित किए जाएंगे। मुख्य मंडप में लगभग 26 फीट व्यास का कलात्मक गुंबद इसकी भव्यता को और अधिक आकर्षक बनाएगा।
निर्माण कार्य में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जाएगा। संपूर्ण मंदिर 121 कलशों से अलंकृत होगा और 16 फीट ऊंची जगती पर स्थापित किया जाएगा। स्थापत्य विशेषज्ञों के अनुसार यह मंदिर भारतीय शिल्प, मूर्तिकला और वास्तु विज्ञान के संरक्षण एवं संवर्धन का उत्कृष्ट केंद्र बनेगा।
एकात्म धाम: भारत की सांस्कृतिक एकता का केंद्र
एकात्म धाम परियोजना का मूल उद्देश्य आदि शंकराचार्य के जीवन, दर्शन और सांस्कृतिक योगदान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। आचार्य शंकर ने संपूर्ण भारत का भ्रमण कर राष्ट्र को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य किया था। अद्वैत वेदांत के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि संपूर्ण सृष्टि एक ही चेतना का विस्तार है।
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास द्वारा विकसित किए जा रहे एकात्म धाम में पहले चरण में 108 फीट ऊंची ‘एकात्मता की मूर्ति’ स्थापित की जा चुकी है, जो देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। वहीं दूसरे चरण में हजारों करोड़ रुपये की लागत से ‘अद्वैत लोक’ संग्रहालय का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें आचार्य शंकर के जीवन, यात्राओं, दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास को मिलेगा बढ़ावा
पंचायतन मंदिर के निर्माण से ओंकारेश्वर की पहचान केवल ज्योतिर्लिंग नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भारतीय दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक अध्ययन के एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में भी उभरेगा। मंदिर और एकात्म धाम परियोजना से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिलेगी, जिससे स्थानीय रोजगार, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एकात्म धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनेगा। यह परियोजना भारतीय संस्कृति के उस स्वरूप को दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगी, जो विविधता में एकता और समरसता का संदेश देता है।
सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा को पुनः प्रतिष्ठित करने का प्रयास है। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों को आदि शंकराचार्य के समन्वयवादी दर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति की विराटता से परिचित कराएगा।
ओंकारेश्वर की पावन भूमि पर प्रारंभ हुई यह परियोजना भविष्य में भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता की सशक्त प्रतीक बनकर उभरेगी। पंचायतन मंदिर का यह शिलान्यास निश्चित रूप से भारतीय संस्कृति के गौरवशाली भविष्य की आधारशिला के रूप में याद किया जाएगा।
