खंडवा से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को दी ऐतिहासिक सौगात: मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के खातों में 3300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित, बलराम कृषि महोत्सव बना आधुनिक कृषि और समृद्ध किसान का महापर्व

खंडवा- मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाते हुए किसानों के आर्थिक उत्थान, तकनीकी सशक्तिकरण और कृषि क्षेत्र में नवाचारों को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी कड़ी में सोमवार को खंडवा की नई कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित जिला स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव प्रदेश के कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्चुअल माध्यम से प्रदेशभर के किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 82 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में 3300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित की। यह राशि सीधे किसानों के खातों में पहुंचने से खेती-किसानी के कार्यों को नई गति मिलेगी तथा किसानों को खरीफ एवं आगामी कृषि सीजन की तैयारियों में आर्थिक संबल प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान कृषि प्रधान राज्य के रूप में है और प्रदेश की समृद्धि किसानों की समृद्धि से जुड़ी हुई है। इसलिए सरकार किसानों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, बाजार से बेहतर जुड़ाव और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि खेती अब केवल परंपरागत तरीके तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विज्ञान और तकनीक के समन्वय से कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों का आह्वान करते हुए कहा कि वे प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण, ड्रोन तकनीक और डिजिटल कृषि सेवाओं को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत कम करें। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच वैज्ञानिक पद्धति से खेती करना समय की आवश्यकता है और सरकार इस दिशा में किसानों को हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है।

आर्थिक सहायता से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत अंतरित की गई 3300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। समय पर मिलने वाली यह सहायता किसानों को बीज, उर्वरक, कृषि यंत्र, सिंचाई और अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति में मदद करेगी। इससे किसानों की साहूकारों पर निर्भरता कम होगी तथा कृषि उत्पादन में भी सकारात्मक वृद्धि की संभावना बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाने से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, उत्पादन क्षमता में सुधार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

आधुनिक कृषि तकनीकों का जीवंत प्रदर्शन बना आकर्षण

बलराम कृषि महोत्सव में कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य पालन विभाग, सहकारिता विभाग, कृषि अभियांत्रिकी विभाग सहित विभिन्न शासकीय संस्थाओं द्वारा आधुनिक कृषि तकनीकों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनों में किसानों को ड्रोन के माध्यम से फसल प्रबंधन, आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली, मृदा परीक्षण, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, उन्नत बीज, बागवानी, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि आधारित उद्यमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

किसानों ने इन प्रदर्शनों में गहरी रुचि दिखाई और आधुनिक तकनीकों को अपनी खेती में अपनाने की इच्छा व्यक्त की। कई किसानों ने कृषि यंत्रों और डिजिटल तकनीकों के उपयोग से उत्पादन लागत कम करने और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त करने के संबंध में विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की।

कृषि वैज्ञानिकों ने दिया व्यवहारिक मार्गदर्शन

महोत्सव के दौरान कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधा संवाद किया। उन्होंने बदलते मौसम के अनुरूप खेती की रणनीति, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, फसल विविधीकरण, पोषक तत्व प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। किसानों की व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया, जिससे यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम न रहकर एक व्यवहारिक प्रशिक्षण शिविर का स्वरूप लेता दिखाई दिया।

कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को मिला बढ़ावा

महोत्सव में केवल खेती ही नहीं, बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन और कृषि आधारित लघु उद्योगों पर भी विशेष जोर दिया गया। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने की जानकारी मिली। सरकार का उद्देश्य किसानों को बहुआयामी कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो सके।

हजारों किसानों की सहभागिता ने बढ़ाई आयोजन की गरिमा

खंडवा जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी इस महोत्सव में शामिल हुए। किसानों ने शासन की योजनाओं की जानकारी लेने के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। कार्यक्रम में किसानों के उत्साह ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश के कृषक अब पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने के प्रति भी तेजी से जागरूक हो रहे हैं।

आत्मनिर्भर और समृद्ध किसान की दिशा में प्रभावी कदम

बलराम कृषि महोत्सव केवल एक शासकीय आयोजन नहीं, बल्कि किसानों को ज्ञान, तकनीक, नवाचार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रभावी मंच साबित हुआ। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अंतर्गत दी गई आर्थिक सहायता और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूकता का यह समन्वय प्रदेश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

खंडवा से प्रदेशभर के किसानों को दी गई यह सौगात इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश सरकार कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने और कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति लाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यदि किसान आधुनिक तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और शासन की योजनाओं का समुचित लाभ उठाते हैं, तो मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन, गुणवत्ता और किसान समृद्धि के नए आयाम स्थापित करने में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान और अधिक मजबूत करेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *