मॉं नर्मदा के जलमार्ग में नौका विहार… ओंकारेश्वर में महासवारी ने रचा भक्ति और वैभव का अनुपम दृश्य

ओंकारेश्वर- श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की पारंपरिक महासवारी राजसी वैभव, धार्मिक परंपराओं और भक्तों के उत्साह के बीच निकाली गई। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकली इस महासवारी ने संपूर्ण तीर्थनगरी को शिवमय बना दिया।

सुबह से ही ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा था। मंदिर परिसर, घाटों, झूला पुल और प्रमुख मार्गों पर शिवभक्तों की लंबी कतारें दिखाई दीं। हर-हर महादेव और ऊँ नमः शिवाय के गगनभेदी जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंदिरों को आकर्षक फूलों और विद्युत सज्जा से सजाया गया था, जिससे संपूर्ण तीर्थनगरी उत्सवधर्मी स्वरूप में नजर आई।

राजसी वैभव के साथ निकली महासवारी

दोपहर में भगवान ओंकारेश्वर की पारंपरिक महासवारी श्री ओंकारेश्वर मंदिर से प्रारंभ हुई। सुसज्जित रथ और धार्मिक ध्वजों के साथ निकली सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कोटितीर्थ घाट पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्प अर्पित कर भगवान का स्वागत किया तथा दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु खड़े रहे।

कोटितीर्थ घाट पर वैदिक ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन, अभिषेक और महाआरती संपन्न हुई। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की रजत प्रतिमाओं को नर्मदा जलमार्ग से नौका विहार के लिए ले जाया गया।

नर्मदा में नौका विहार बना मुख्य आकर्षण

महासवारी का सबसे आकर्षक और भावनात्मक क्षण तब आया, जब भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की रजत प्रतिमाओं का मां नर्मदा के पावन जल में नौका विहार कराया गया। सुसज्जित नौकाओं में विराजमान भगवान के दर्शन के लिए नर्मदा के दोनों तटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

नर्मदा की लहरों पर आगे बढ़ती भगवान की नौका और श्रद्धालुओं के जयघोषों ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में डूब गया। हजारों श्रद्धालु इस दुर्लभ और दिव्य दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।

गोमुख घाट पर हुआ दिव्य मिलन

नौका विहार के बाद गोमुख घाट पर भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की सवारियों का पारंपरिक मिलन हुआ। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह मिलन भगवान शिव के दिव्य स्वरूप और सनातन परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। दोनों स्वरूपों के मिलन के बाद संयुक्त महासवारी नगर भ्रमण के लिए आगे बढ़ी।

सुरक्षा और व्यवस्थाओं के रहे व्यापक इंतजाम

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और श्री ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। महासवारी मार्ग, मंदिर परिसर, घाट क्षेत्रों और प्रमुख चौराहों पर पुलिस बल, होमगार्ड, एसडीआरएफ और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई।

एसडीओपी श्री मनोहर गवली ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष निगरानी रखी गई है। यातायात नियंत्रण, पार्किंग, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल और आपातकालीन सहायता के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए।

शिवभक्ति में डूबा ओंकारेश्वर

श्रावण मास के अंतिम सोमवार पर निकली भगवान ओंकारेश्वर और भगवान ममलेश्वर की महासवारी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बन गई। नर्मदा के तट पर उमड़ा जनसैलाब, भगवान का नौका विहार और गूंजते शिव जयकारों ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

ओंकारेश्वर में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही और पूरा क्षेत्र भगवान शिव की आराधना, भक्ति और उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।

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