खंडवा- प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में विधिक साक्षरता एवं विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर जागरूकता और संवेदना से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विधिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ भारत विभाजन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी को स्मरण करना और राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को मजबूत करना रहा।
वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुआ विधिक साक्षरता कार्यक्रम का शुभारंभ
विधिक साक्षरता कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से हुआ। इसके पश्चात जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री दिलावर सिंह ने विद्यार्थियों को भारतीय संविधान में निहित समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता के प्रावधानों की जानकारी दी।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39(क) का उल्लेख करते हुए बताया कि समाज के पात्र एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को न्याय प्राप्त करने में आर्थिक या अन्य परिस्थितियां बाधा न बनें, इसके लिए विधिक सहायता की व्यवस्था की गई है। उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत संचालित विभिन्न विधिक सेवा संस्थाओं की भूमिका भी विस्तार से समझाई।
श्री सिंह ने राष्ट्रीय स्तर पर नालसा, राज्य स्तर पर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला स्तर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता एवं सेवाओं की जानकारी विद्यार्थियों को दी। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे स्वयं कानूनी रूप से जागरूक बनें और जरूरतमंद लोगों तक भी विधिक सहायता से जुड़ी जानकारी पहुंचाएं।
कानून की जानकारी के साथ जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश
कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनिल चौधरी ने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों, मादक पदार्थों से संबंधित अपराधों तथा उनके गंभीर कानूनी दुष्परिणामों के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया।
उन्होंने बाल विवाह, सार्वजनिक स्थानों पर बीड़ी-सिगरेट के सेवन, लाइसेंस की अनिवार्यता सहित विभिन्न विधिक विषयों पर विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब दिए। संवाद के दौरान विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि कानून केवल अपराध और दंड तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ उनके कर्तव्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से भी जुड़ा है।
श्री चौधरी ने विद्यार्थियों को कानून का उचित, जिम्मेदार और जागरूक होकर उपयोग करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी जानकारी व्यक्ति को न केवल अपने अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम बनाती है, बल्कि उसे समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार नागरिक भी बनाती है।
प्राचार्य ने विद्यार्थियों से विधिक रूप से जागरूक बनने का किया आह्वान
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों और विधिक दायित्वों की जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में कानून के प्रति समझ विकसित होने से समाज में जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना मजबूत होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से विधिक रूप से जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनिल चौधरी तथा जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री दिलावर सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।
मौन रैली निकालकर विभाजन की त्रासदी को किया याद
विधिक साक्षरता कार्यक्रम के पश्चात विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर महाविद्यालय के विद्यार्थियों तथा समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ द्वारा मौन रैली निकाली गई। रैली के दौरान सभी प्रतिभागियों ने मौन धारण कर भारत विभाजन के दौरान पीड़ित हुए परिवारों और अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों के प्रति श्रद्धांजलि एवं संवेदना व्यक्त की।
मौन रैली का उद्देश्य केवल इतिहास की एक त्रासद घटना को याद करना नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देना भी रहा कि देश की एकता, अखंडता, सामाजिक सौहार्द और मानवीय संवेदना को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए।
विभाजन की पीड़ा को व्याख्यान के माध्यम से किया जीवंत
मौन रैली के पश्चात वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार गोयल ने भारत विभाजन के समय की परिस्थितियों और उससे उत्पन्न मानवीय त्रासदी पर अत्यंत संवेदनशील एवं मार्मिक व्याख्यान दिया।
उन्होंने विभाजन के दौरान विस्थापित हुए परिवारों की पीड़ा, संघर्ष और कठिन परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए उस दौर की स्मृतियों को विद्यार्थियों के सामने रखा। उन्होंने बताया कि विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का परिवर्तन नहीं था, बल्कि इसके पीछे असंख्य परिवारों का विस्थापन, बिछड़ना, संघर्ष और गहरी मानवीय पीड़ा जुड़ी हुई थी।
उनके भावपूर्ण व्याख्यान से विद्यार्थी भावुक हुए और उन्होंने विभाजन की विभीषिका को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी घटना के रूप में समझने का प्रयास किया।
जागरूकता के साथ एकता और सद्भाव का संदेश
महाविद्यालय में आयोजित इन कार्यक्रमों ने एक ओर विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता और नागरिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया, वहीं दूसरी ओर विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ने उन्हें इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में विधिक जागरूकता के साथ राष्ट्र, समाज और मानवता के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का सार्थक संदेश दिया।
