खंडवा- प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान की प्रवृत्ति और नवाचार की भावना विकसित करने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। भौतिकशास्त्र विभाग एवं स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का विषय “प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार” रहा।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस. पी. सिंह ने युवाओं की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान में भी सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी बदलाव के महत्वपूर्ण वाहक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं और जिम्मेदारियों को पहचानते हुए पूरी प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
अनुसंधान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण समय की आवश्यकता
भौतिकशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अविनाश दुबे ने वैज्ञानिक सोच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय तकनीकी परिवर्तन और नई खोजों का दौर है। ऐसे में विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, समस्याओं को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने और उनके समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित होना आवश्यक है। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार को उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए विद्यार्थियों को नई संभावनाओं की तलाश के लिए प्रेरित किया।
तकनीकी विकास में युवाओं की भूमिका पर विशेष व्याख्यान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. प्रेमांश दुधे, सहायक प्राध्यापक, रसायनशास्त्र विभाग ने “प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार” विषय पर विस्तृत एवं सारगर्भित व्याख्यान दिया। उन्होंने तकनीकी विकास के वर्तमान परिदृश्य में अनुसंधान एवं नवाचार की बढ़ती आवश्यकता को रेखांकित किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि तकनीक का प्रभाव आज शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, कृषि, संचार और रोजगार सहित जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका केवल विकसित तकनीकों के उपयोगकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि नई तकनीकों और समाधानों के निर्माणकर्ता के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, रचनात्मकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान की शुरुआत किसी बड़ी प्रयोगशाला से ही नहीं होती, बल्कि किसी समस्या को समझने, उसके कारणों पर विचार करने और बेहतर समाधान खोजने की जिज्ञासा से होती है। यही जिज्ञासा आगे चलकर नवाचार और नई खोजों का आधार बन सकती है।
युवाओं में नवाचार की भावना विकसित करने पर जोर
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बदलती तकनीकी दुनिया में युवाओं को निरंतर सीखने और अपने ज्ञान को अद्यतन रखने की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी कौशल के माध्यम से रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता की संभावनाओं की दिशा में भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि देश की युवा शक्ति में नई सोच और समस्याओं के समाधान खोजने की क्षमता है। यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर उपलब्ध हों तो वे स्थानीय समस्याओं के समाधान से लेकर राष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों तक में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को तकनीक और अनुसंधान के बदलते स्वरूप को समझने का अवसर प्रदान किया। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सोनू सेन ने किया। इस अवसर पर प्रो. रवि व्यास, डॉ. सपना तिवारी सहित महाविद्यालय के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है। ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी देश को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर आयोजित यह विशेष व्याख्यान विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर नई सोच विकसित करने, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़ाने और नवाचार के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने की दिशा में प्रेरित करने वाला रहा।
