राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस पर एस.एन. कॉलेज में जागरूकता का संदेश, व्याख्यान और प्रश्नोत्तरी आयोजित | 50 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया उत्साहपूर्वक हिस्सा, भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़कर समझाया अक्षय ऊर्जा और सतत विकास का महत्व

खंडवा- प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, श्री नीलकंठेश्वर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खंडवा में राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों को स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण और सतत विकास के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। महाविद्यालय के भौतिक शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में व्याख्यान एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा के महत्व और वर्तमान समय में इसकी बढ़ती आवश्यकता की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में 50 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का आयोजन भौतिक शास्त्र विभागाध्यक्ष अविनाश दुबे के मार्गदर्शन तथा भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की प्रभारी अर्चना मोरे के सहयोग से किया गया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा के वैज्ञानिक पक्ष से परिचित कराने के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति, ऊर्जा और संसाधनों के संतुलित उपयोग की अवधारणा से जोड़ना रहा।

अक्षय ऊर्जा को बताया भविष्य की आवश्यकता

कार्यक्रम में डॉ. सोनू सेन एवं डॉ. अर्पणा अग्रवाल ने विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए। उन्होंने अक्षय ऊर्जा की उपयोगिता, ऊर्जा संरक्षण की आवश्यकता तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में स्वच्छ ऊर्जा की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा सहित विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत प्राकृतिक रूप से उपलब्ध होते हैं और इनके उपयोग को बढ़ावा देकर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम की जा सकती है। वर्तमान समय में बढ़ती ऊर्जा मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए अक्षय ऊर्जा का उपयोग केवल विकल्प नहीं, बल्कि दीर्घकालीन विकास के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकता बन गया है।

भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ा प्रकृति संरक्षण

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि अक्षय ऊर्जा के विषय को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़कर विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत किया गया। वक्ताओं ने प्रकृति के साथ संतुलित जीवन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उनके विवेकपूर्ण उपयोग की भारतीय अवधारणाओं पर प्रकाश डाला।

विद्यार्थियों को बताया गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रकृति को केवल संसाधन के रूप में नहीं, बल्कि जीवन व्यवस्था के अभिन्न अंग के रूप में देखा गया है। ऐसे में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक प्रकृति-अनुकूल जीवन मूल्यों के समन्वय से सतत विकास की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह

कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रो. रवि व्यास द्वारा राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण, सतत विकास तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े प्रश्नों के उत्तर दिए।

प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों को विषय की जानकारी को रोचक एवं सहभागितापूर्ण तरीके से समझने का अवसर मिला। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों की जिज्ञासा, ज्ञान और बौद्धिक क्षमता को भी सामने लाने का कार्य किया।

युवाओं को ऊर्जा संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सोमपाल सिंह ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर भौतिक शास्त्र विभाग, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की भी आवश्यकता है। युवाओं को ऊर्जा संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को समझते हुए अपने दैनिक जीवन में ऊर्जा के विवेकपूर्ण उपयोग की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जागरूकता के माध्यम से समाज में भी ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश प्रभावी रूप से पहुंचा सकते हैं।

विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता से सफल रहा आयोजन

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आभार प्रदर्शन डॉ. सपना तिवारी द्वारा किया गया। आयोजन में स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने कार्यक्रम को प्रभावी और उद्देश्यपूर्ण बनाया।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को अक्षय ऊर्जा के वैज्ञानिक महत्व के साथ ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन, सतत विकास और भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित प्रकृति-अनुकूल जीवन मूल्यों की उपयोगिता से परिचित कराया गया। आयोजन ने विद्यार्थियों के बीच यह संदेश मजबूत किया कि स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और ऊर्जा संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *